तलाश में हूँ बीते लम्हें संजोने को जो तजुर्बे देकर चेहरे का नूर ले गये |
हारिये न हिम्मत तब तक , जब तक हड्डियों में जान बाकी है |
दर्द दिल में जितना गहरा हो , कंधे उतने मजबूत हो जाते हैं |
खूब कहा किसी ने , लालच , शंका और डर इन्सान की प्रगति में सबसे बड़े बाधक हैं |
क्या खूब कहा किसी ने - खेल है बाकि अभी , मैं अभी हारा नहीं |
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Thursday, 26 July 2018

माँ से है गुजारिश/एक संदेश माँ के नाम

वर्ष 2014 की लिखी एक कविता जो कहीं खो गयी थी आज लिखी मिल गयी । एक माँ को उसके बेटे की वर्षगांठ समारोह पर भेंट की थी । उम्मीद है आप सभी को भी दिल से पसन्द आएगी ।

नन्हें की माँ से है आज एक गुजारिश
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे
वर्षगांठ के साथ कुछ और बातें याद करे
बच्चे का पालन बहुत बड़ी उपाधि है ।
किसी ने निभाई पूरी तो किसी ने निभाई आधी है ।
उसे ऐसे ऐसे संस्कार सिखाना
सफल हो उसका इस धरा पर आना
उसकी सोच को तुम शिखर तक पहुँचाना
सीख ले वो हर बाधा को पार कर जाना
ऐसे ऐसे वो प्रयास करे
खुद भी हो विकसित , समाज का भी विकास करे
कर्मों से समाज की शान बने
आपके गर्व का प्रमाण बने
माँ की उपाधि बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ।
पर आजकल दुनिया इससे भागती जा रही है
इरादा नहीं किसी अच्छी माँ पर कटाक्ष करूँ
पर कोशिश है कि सोई माँ को जगाने का प्रयास करूँ ।
आज की पीढ़ी आधुनिक होती जा रही है
हमारी सभ्यता को डुबोती जा रही है
बन जाये आपका नन्हा कुल का वारिस
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश है
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे
हर वर्षगांठ पर ये सब बातें याद करे
कृष्ण मलिक अम्बाला

कड़े कलयुग


कड़े कलयुग में कद्र को बरकरार रखना है तो कद्र करवाने वालों की जरूरत बने रहना होगा |


क्यूंकि आजकल दुनिया न शौंक  से और न दिल से ,


बल्कि जरूरत से जुड़ना पसंद करती है |

जिसने सुना हमारे बारे में / शायरी की उड़ान


जिसने सुना हमारे बारे में , हमें देखा नहीं , जिसने देखा उसने 

समझा नहीं ,और जिसने समझा उसने ठीक से जाना नहीं ,यूहीं बीत 

गया सफर जिंदगी का

एहसान कर खुद से खुदी पर/शायरी की उड़ान

अर्ज किया है |


एहसान कर खुद से खुदी पर कुछ इस कदर ,

कि जीते जी बन जाये तेरे कर्म ही हर मोड़ पर पहचान तेरी ।।

Wednesday, 25 July 2018

कुछ अनुभव हैं अनोखे से , जरा अपना कर देखे तो कोई

पलक झपकते ही जो भूल जाएं
उन्हें कैसे दिल मे रोके कोई
कुछ अनुभव है अनोखे से
जरा अपना कर देखे तो कोई
आंखों में पढ़ने को है दर्द की गहराई
किसी अपने को ही ये बात जाती है समझाई
बस कोई अपना समझकर देखे तो कोई
कुछ अनुभव है अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
साथ मिलकर चलते हैं कई रिश्ते
लेकिन सभी का है अलग ही किनारा
किनारे लगते हुए आंख गीली हो जाती है
ऐसा एहसास पाने को सोचे तो कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
जब तक रहिये,हंसते हुए गुजारिये अनमोल पलों को
कब किसे खुदा कहाँ ले जाये , ये क्या जान सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
खुशी गम तो हैं तो तराने जीवन के
बारिश पतझड़ तो है बहाने मौसम के
माया उसकी को क्या समझ सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
जीते जी कर सको दुनिया के वास्ते कुछ तो बेहतर
मरकर पत्थरों पर तो खुद जाता है हर कोई
जब जीकर ही रही बेकार जिंदगी , तो क्या मरने पर सँवार सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
दिलों में बसकर रहो सभी के , कर्म होंगे अगर जिंदादिली के
सहारा बनकर दूसरों का , चमके तुम बहार खिली से
अनदेखा कर बेसहारा को , क्या ऊंचा उठ सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
कृष्ण मलिक अम्बाला 28.04.2017

Thursday, 19 July 2018

Three tips to success in all classes of any field/किसी भी कक्षा में सफल होने के तीन मूल मन्त्र


किसी भी कक्षा में हों बस ये तीन मूल मन्त्र याद रखें |1.   एकांत 



2. नियमितता   


3.पहले समझना फिर लिख लिख कर  याद करना 


जब मर्जी इसे आजमा लीजिये |


कृष्ण मलिक अम्बाला की कलम से 

Monday, 16 July 2018

किसी बड़े काम को

किसी बड़े काम को ये समझ कर मत कीजिये कि काम की वजह से आपको इज्जत मिले बल्कि छोटे से छोटे काम को इतने अच्छे ढंग से कीजिये की आपकी वजह से काम को इज्जत मिले |कृष्ण मलिक अम्बाला 



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राखी पर एक सटीक पोस्ट

बंधवा कर राखी तुझसे ओ मेरी बहना 




सभी बहनों को इस भाई की तरफ से रक्षाबंधन की प्रस्तुति ।


उम्मीद है सभी बहनें प्यार बरसायेंगीं।??????????

बंधवा कर राखी तुझसे ओ मेरी बहना ।भाई चाहता है तुझसे कुछ कहना । 

बेशक पड़े तुझे पराये घर में रहना ।

पर हर गम को तूने , ख़ुशी से है सहना ।शिष्टाचार की तुम मूरत बनो ।

सभ्यता की असली सूरत बनो ।तेरे चाल चलन पर हो गर्व मुझे ।हर कोई कहने को तरसे , बहन तुझे ।आधुनिकता के जाल में तुम मत फंसना ।

न देखना पड़े भाई को , तुझ पर जग हंसना ।

तेरी सादगी का आदर और सत्कार करूँ ।हर मुसीबत में रक्षा तेरी , बारम्बार करूँ ।

फर्ज के तराजू का सन्तुलन बना बढ़ते रहना ।बन जाए वाणी की मिठास , तेरे होंठों का गहना ।

बंधवा कर राखी तुझसे ओ मेरी बहना …….

तेरे ससुराल में तुझ पर मान करे हर कोई ।ढूंढने पर भी मिलने न पाये कमी तुझमे कोई ।

मर्यादा में रहना , पति की बन कर रानी।

तेरे संस्कार पर भी , बन जाये कोई कहानी।

पाक कला से मुख न मोड़ना तुम ।

फैशन के लिए नाता परिवार से न तोडना तुम ।

टीवी की लत तेरा घर तोड़ सकती है ।फेसबुक और व्हाट्स एप्प भी रिश्ते मरोड़ सकती है ।

नहीं बुरी है ये सब सहूलत , अगर सही प्रयोग करेगी।

अगर फंस गयी इस बीमारी में , हर पल दुःख भोग करेगी।

नारी है नारीत्व का कर शिंगार हर पल।पहचान पुरानी तुम भूलकर , भटक न जाना तुम आजकल ।

तेरी क़ुरबानी पर फ़िदा हो बच्चे तेरे ।कर दे सच सब , ये ख्वाब सच्चे मेरे ।

सास ससुर का आदर माँ बाप की तरह करती रहना ।

चमके तेरे कर्म की खुशबू से , समाज का हर कोना ।

बंधवा कर राखी तुझसे ओ मेरी बहना ।

भाई चाहता है तुझसे बस यही कहना ।

सभी बहनों का राष्ट्र भाईकवि एवम् शायरकृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा ।Written on. 16.08.2016

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Monday, 2 July 2018

लाडला मोबाइल

लाडला मोबाइल है जब  से आ गया 
             तकनीकी रफ्तार की क्रांति ला गया |
तरक्की की आंधी चली कुछ इस कदर 
            एक टच में ही इन्सान जैसे सब कुछ पा गया |
लेकिन रिश्तों में नजदीकियां कुछ इस कदर हुई 
            पल पल के झगड़े का खबरी ये बना गया |
जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि ,
            होती थी कभी ये पुरानी कहावत |
आजकल तो जहाँ न पहुंचे मिसाईल वहां पहुंचे मोबाइल          
            कहावत सिद्ध करके दिखा गया |
लेकिन अवसाद की लत का कहर यह ,
             कुछ इस कदर विश्व में ढा गया |
भीड़ में हों चाहे किसी महफ़िल की छाँव में ,
             अकेलेपन को यह अनुभव करवा गया |
मिलने मिलाने में हिचकती है हर आँख अब ,
              हर कोई मोबाइल को हमदर्द बना गया |
सामाजिकता हो गयी अब बीती बातें ,
              खुद मस्ती में मस्त सभी को बना गया |
चार सदस्य हों परिवार के अगर ,
             सभी के होते है निजी मोबाइल |
किसी से बातचीत करना है अब व्यर्थ विवाद ,
               यही तो है सभी का लिविंग स्टाइल |
उपयोग उठाना था आधुनिकता का मतलब ,
               लेकिन अति अति सब करवा गया |
कुछ भी खो ये लाडला मोबाइल जब से आ  गया |
               तकनीकी रफ्तार की क्रांति ला गया |
तरक्की की आंधी चली कुछ इस कदर ,
               एक टच में ही इन्सान जैसे सब कुछ पा गया |
Written on 30.03.2018




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