लेखक परिचय – कृष्ण मलिक
कृष्ण मलिक एक संवेदनशील साहित्यकार, कवि, शायर एवं विचारक हैं, जिनकी लेखन यात्रा मात्र 14 वर्ष की आयु में प्रारम्भ हुई। विद्यालय में अपनी हिंदी अध्यापिका से मिली प्रेरणा ने उनके भीतर साहित्य के प्रति ऐसा प्रेम जागृत किया कि कलम उनकी जीवनसंगिनी बन गई। तब से लेकर आज तक रचनात्मकता उन्हें निरंतर नई रचनाओं के सृजन के लिए प्रेरित करती रही है। उनका मानना है कि “जब तक जीवन है, तब तक लेखन चलता रहना चाहिए।”
पेशे से कृष्ण मलिक ऑटोमोबाइल इंजीनियर एवं मैकेनिकल इंजीनियर हैं तथा वर्तमान में शिक्षा विभाग में व्यावसायिक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। तकनीकी क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए भी उन्होंने साहित्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सदैव बनाए रखा है। अब तक वे लगभग 200 कविताएँ, लेख, शायरियाँ एवं अन्य साहित्यिक रचनाएँ लिख चुके हैं, जिनमें सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएँ, जीवन-दर्शन और सकारात्मक विचारों का समावेश मिलता है।
कृष्ण मलिक का विश्वास है कि कलम की शक्ति समाज में जागरूकता लाने और भौतिकवाद की दौड़ में उलझे मानव को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करने का सशक्त माध्यम है। उनकी लेखनी का मुख्य उद्देश्य शब्दों के माध्यम से जन-जन को आनंदित, प्रेरित एवं जागृत करना है। वे मानते हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक प्रभावशाली माध्यम भी है।
हिंदी भाषा के प्रति उनका विशेष अनुराग है। उनके अनुसार हिंदी एक सरल, सहज एवं व्यापक भाषा है, जो भारत की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में जोड़ने की क्षमता रखती है।
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