तलाश में हूँ बीते लम्हें संजोने को जो तजुर्बे देकर चेहरे का नूर ले गये |
हारिये न हिम्मत तब तक , जब तक हड्डियों में जान बाकी है |
दर्द दिल में जितना गहरा हो , कंधे उतने मजबूत हो जाते हैं |
खूब कहा किसी ने , लालच , शंका और डर इन्सान की प्रगति में सबसे बड़े बाधक हैं |
क्या खूब कहा किसी ने - खेल है बाकि अभी , मैं अभी हारा नहीं |
आपके मन में कोई भी पोस्ट से संबंधित टिप्पणी हो तो आप उस पोस्टके नीचे कमेंट कर सकते हैं |

हमारे बारे

लेखक कृष्ण मलिक अम्बाला 14 वर्ष की आयु से लिखते हैं , हिंदी की आध्यापिका से प्रेरित होकर कलम को ऐसे चलाया की आज तक रचनात्मकता उन्हें रात रात भर जगाए रखती है , उनके अनुसार जिन्दा है तो लिखता चल |

उनकी ईमेल का सम्पर्क है :-
आप अपने सुझाव एवं  टिप्पणियाँ ईमेल के माध्यम से , एवं अपना कोई व्यक्तिगत संदेश ईमेल के माध्यम से पहुंचा सकते  हैं |

ksmalik2828@gmail.com


No comments:

Post a Comment