तलाश में हूँ बीते लम्हें संजोने को जो तजुर्बे देकर चेहरे का नूर ले गये |
हारिये न हिम्मत तब तक , जब तक हड्डियों में जान बाकी है |
दर्द दिल में जितना गहरा हो , कंधे उतने मजबूत हो जाते हैं |
खूब कहा किसी ने , लालच , शंका और डर इन्सान की प्रगति में सबसे बड़े बाधक हैं |
क्या खूब कहा किसी ने - खेल है बाकि अभी , मैं अभी हारा नहीं |
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Saturday, 4 August 2018

दोस्ती/friendship poetry

दोस्ती
एक सन्त ने कहा जब दो आत्माएं  एक दूसरे के लिए होती है सती तो ही होती है दोस्ती ।
इसलिए मन किया दोस्ती पर एक रचना लिखी जाये और एक मित्र का भी आह्वान था कि आप दोस्ती पर लिखें कुछ तो पढ़िए
"दोस्ती "
जिस नाम को सुनते ही आती है चेहरे पर ख़ुशी
वही तो होती है लाजवाब , मेरे जनाब दोस्ती
इसके किस्से इतिहासों में लाखों मिलते हैं
कृष्ण सुदामा सुनते भी कई चेहरे खिलते है
कुछ स्वरूप दोस्ती का आजकल बदल इस कदर गया
बलिदान से बदल हर दोस्त , चढ़ स्वार्थ की डगर गया
दोस्ती तो होता ही नाम कुर्बानी का
जो हो ऐसे , रखे याद जमाना उसकी बलिदानी का
अब तो लोग दोस्तों से व्यापार किया करते हैं
यार होकर अधिकतर यार मार किया करते हैं
वक़्त की सुनामी कब किसे बहा ले जाये क्या पता
दोस्त को दुःखी करने की न कर ये खता
दोस्त तो तेरे हर लम्हें में तेरी परछाई है
ये बात हर किसी के कहाँ समझ में आई है ।
दोस्ती है रहमत खुदा की , जिसने दिल से निभायी है ।
बताने दोस्ती की दास्ताँ , मलिक ने कलम चलाई है ।
परखो दोस्त को लाख बार , पर जब हो जाये विश्वास
फिर ना पीछे हटना उससे , बेशक खत्म हो जाये तेरे  पूरे श्वास
बदलते वक़्त में बेशक राही ने ढलते जाना है ।
पर दोस्ती ने तो ऐसे ही चलते जाना है ।

दोस्ती ने तो ऐसे ही चलते जाना है।
आपका कृष्ण मलिक अम्बाला©®
03.07.2016

Thursday, 26 July 2018

माँ से है गुजारिश/एक संदेश माँ के नाम

वर्ष 2014 की लिखी एक कविता जो कहीं खो गयी थी आज लिखी मिल गयी । एक माँ को उसके बेटे की वर्षगांठ समारोह पर भेंट की थी । उम्मीद है आप सभी को भी दिल से पसन्द आएगी ।

नन्हें की माँ से है आज एक गुजारिश
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे
वर्षगांठ के साथ कुछ और बातें याद करे
बच्चे का पालन बहुत बड़ी उपाधि है ।
किसी ने निभाई पूरी तो किसी ने निभाई आधी है ।
उसे ऐसे ऐसे संस्कार सिखाना
सफल हो उसका इस धरा पर आना
उसकी सोच को तुम शिखर तक पहुँचाना
सीख ले वो हर बाधा को पार कर जाना
ऐसे ऐसे वो प्रयास करे
खुद भी हो विकसित , समाज का भी विकास करे
कर्मों से समाज की शान बने
आपके गर्व का प्रमाण बने
माँ की उपाधि बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ।
पर आजकल दुनिया इससे भागती जा रही है
इरादा नहीं किसी अच्छी माँ पर कटाक्ष करूँ
पर कोशिश है कि सोई माँ को जगाने का प्रयास करूँ ।
आज की पीढ़ी आधुनिक होती जा रही है
हमारी सभ्यता को डुबोती जा रही है
बन जाये आपका नन्हा कुल का वारिस
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश है
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे
हर वर्षगांठ पर ये सब बातें याद करे
कृष्ण मलिक अम्बाला

कड़े कलयुग


कड़े कलयुग में कद्र को बरकरार रखना है तो कद्र करवाने वालों की जरूरत बने रहना होगा |


क्यूंकि आजकल दुनिया न शौंक  से और न दिल से ,


बल्कि जरूरत से जुड़ना पसंद करती है |

जिसने सुना हमारे बारे में / शायरी की उड़ान


जिसने सुना हमारे बारे में , हमें देखा नहीं , जिसने देखा उसने 

समझा नहीं ,और जिसने समझा उसने ठीक से जाना नहीं ,यूहीं बीत 

गया सफर जिंदगी का

एहसान कर खुद से खुदी पर/शायरी की उड़ान

अर्ज किया है |


एहसान कर खुद से खुदी पर कुछ इस कदर ,

कि जीते जी बन जाये तेरे कर्म ही हर मोड़ पर पहचान तेरी ।।

Wednesday, 25 July 2018

कुछ अनुभव हैं अनोखे से , जरा अपना कर देखे तो कोई

पलक झपकते ही जो भूल जाएं
उन्हें कैसे दिल मे रोके कोई
कुछ अनुभव है अनोखे से
जरा अपना कर देखे तो कोई
आंखों में पढ़ने को है दर्द की गहराई
किसी अपने को ही ये बात जाती है समझाई
बस कोई अपना समझकर देखे तो कोई
कुछ अनुभव है अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
साथ मिलकर चलते हैं कई रिश्ते
लेकिन सभी का है अलग ही किनारा
किनारे लगते हुए आंख गीली हो जाती है
ऐसा एहसास पाने को सोचे तो कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
जब तक रहिये,हंसते हुए गुजारिये अनमोल पलों को
कब किसे खुदा कहाँ ले जाये , ये क्या जान सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
खुशी गम तो हैं तो तराने जीवन के
बारिश पतझड़ तो है बहाने मौसम के
माया उसकी को क्या समझ सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
जीते जी कर सको दुनिया के वास्ते कुछ तो बेहतर
मरकर पत्थरों पर तो खुद जाता है हर कोई
जब जीकर ही रही बेकार जिंदगी , तो क्या मरने पर सँवार सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
दिलों में बसकर रहो सभी के , कर्म होंगे अगर जिंदादिली के
सहारा बनकर दूसरों का , चमके तुम बहार खिली से
अनदेखा कर बेसहारा को , क्या ऊंचा उठ सका है कोई
कुछ अनुभव हैं अनोखे से , ज़रा अपना कर देखे तो कोई
कृष्ण मलिक अम्बाला 28.04.2017

Thursday, 19 July 2018

Three tips to success in all classes of any field/किसी भी कक्षा में सफल होने के तीन मूल मन्त्र


किसी भी कक्षा में हों बस ये तीन मूल मन्त्र याद रखें |1.   एकांत 



2. नियमितता   


3.पहले समझना फिर लिख लिख कर  याद करना 


जब मर्जी इसे आजमा लीजिये |


कृष्ण मलिक अम्बाला की कलम से