Monday, 2 July 2018

लाडला मोबाइल/MOBILE POETRY

लाडला मोबाइल है जब  से आ गया 
             तकनीकी रफ्तार की क्रांति ला गया |
तरक्की की आंधी चली कुछ इस कदर 
            एक टच में ही इन्सान जैसे सब कुछ पा गया |
लेकिन रिश्तों में नजदीकियां कुछ इस कदर हुई 
            पल पल के झगड़े का खबरी ये बना गया |
जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि ,
            होती थी कभी ये पुरानी कहावत |
आजकल तो जहाँ न पहुंचे मिसाईल वहां पहुंचे मोबाइल          
            कहावत सिद्ध करके दिखा गया |
लेकिन अवसाद की लत का कहर यह ,
             कुछ इस कदर विश्व में ढा गया |
भीड़ में हों चाहे किसी महफ़िल की छाँव में ,
             अकेलेपन को यह अनुभव करवा गया |
मिलने मिलाने में हिचकती है हर आँख अब ,
              हर कोई मोबाइल को हमदर्द बना गया |
सामाजिकता हो गयी अब बीती बातें ,
              खुद मस्ती में मस्त सभी को बना गया |
चार सदस्य हों परिवार के अगर ,
             सभी के होते है निजी मोबाइल |
किसी से बातचीत करना है अब व्यर्थ विवाद ,
               यही तो है सभी का लिविंग स्टाइल |
उपयोग उठाना था आधुनिकता का मतलब ,
               लेकिन अति अति सब करवा गया |
कुछ भी खो ये लाडला मोबाइल जब से आ  गया |
               तकनीकी रफ्तार की क्रांति ला गया |
तरक्की की आंधी चली कुछ इस कदर ,
               एक टच में ही इन्सान जैसे सब कुछ पा गया |
Written on 30.03.2018




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