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शायरी (कठिनाइयों रुपी बंजर जमीं पर )
शायरी (कठिनाइयों रुपी बंजर जमीं पर )
Krishan malik
June 29, 2018
अर्ज किया है
कठिनाईयों रूपी बंजर जमीं पर
उम्मीदों का एक पौधा लगाइए तो
फिर जब मेहनत का पानी देकर
किस्मत रूपी फूल से
सफलता रूपी फल लगेंगे
तो आनंद रूपी उंगलियां चाटते रह जाओगे ।
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