तलाश में हूँ बीते लम्हें संजोने को जो तजुर्बे देकर चेहरे का नूर ले गये |
हारिये न हिम्मत तब तक , जब तक हड्डियों में जान बाकी है |
दर्द दिल में जितना गहरा हो , कंधे उतने मजबूत हो जाते हैं |
खूब कहा किसी ने , लालच , शंका और डर इन्सान की प्रगति में सबसे बड़े बाधक हैं |
क्या खूब कहा किसी ने - खेल है बाकि अभी , मैं अभी हारा नहीं |
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Saturday, 6 August 2016

कल को खो दिया

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कल को खो दिया , कल का नहीं जानता हूँ 
आज है मेरी मुठ्ठी में , इसे ही अपना मानता हूँ
आपको आनंदित करने में प्रयास रत 
आपके के .एस .मलिक© 13.07.2016
अब अपने पुरे नाम कृष्ण मलिक के साथ ही आपका प्यार पाएंगे।

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