Sunday, 29 March 2020

ईद मुबारक देता हूँ - कृष्ण मलिक अम्बाला/

ईद मुबारक देता हूँ - कृष्ण मलिक अम्बाला/
ईद के सुअवसर पर कुछ पंक्तियाँ ।
कवि कह रहा है —
“ईद मुबारक देता हूँ “
भारत का हूँ मैं एक सिपाही
हिन्दू -मुस्लिम है सब मेरे भाई
हिन्दू हूँ बेशक , सभी को सम्मान देता हूँ
अपने धर्म के साथ, दूसरे से सीखें लेता हूँ
नहीं है दुश्मन हिन्दू मुस्लिम , क्यों व्यर्थ भड़कातें है
चार भाई ही तो है देश में , क्यों नही साथ रह पाते हैं
करता हूँ पुरे जग से आह्वान , बेशक हिन्दू बेशक मुसलमान
हिन्दू रहो बेशक , करो दूसरे धर्मों का भी सम्मान
अच्छाई बुराई सब धर्म में मिलेगी , कुछ राक्षसों का है परिणाम
नहीं तो सभी धर्म ही सुनाएँ , अमन चैन का पैगाम
एक ही डाली के हैं सब फूल
लड़ झग़ड़ने की न कर भूल
खुद भी हूँ हिन्दू , सभी हिंदुओं को कहता हूँ
क्यों नहीं रहते मिलकर तुम , यही अफ़सोस में रहता हूँ
हर धर्म में ज्ञान है अद्भुत , ले लो भाईयों जी भरकर
ज्ञान देने वाला नही है पूछता , दूसरे धर्म से हो तुम मगर
मुस्लिम भी है मेरे भाई , वफादारी धर्म की उनसे सीखो
तीस रोज देते कुर्बानी , आये अक्ल तो देकर देखो
जागो हिंदुओं जागो, अब तुम जाग ही जाओ
सभी धर्म के हैं अपने भाई , इनको तुम गले लगाओ
हमेशा से हमें एक बात गयी गई है सिखलाई
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई , आपस में सब भाई भाई
आज हिन्दू हो कर ओह रखवालों , पहल एक कर देता हूँ
तुम भी सभी को पहुँचाओ , ईद मुबारक देता हूँ
????????????
तुम भी सभी को पहुँचाओ , ईद मुबारक देता हूँ
©® KRISHAN MALIK 07.07.2016

सपनों की भूख में फर्जों से लिया मुख फेर/SOCIAL AWARENESS POETRY

सपनों की भूख में फर्जों से लिया मुख फेर/SOCIAL AWARENESS POETRY
मैं नहीं हूँ औरत का विरोधी बहना
पर चाहता हूँ समाज से कुछ कहना
आज की औरत अपने फर्ज से मुख मोड़ गयी
नौकरी के चक्कर में बाकि चिंता छोड़ गयी
उसको बहन कैसे याद दिलाएं
पैसे से बड़े फर्ज का मोल
कैसे उसको आईना दिखाएँ
फर्ज होते हैं अनमोल
घर का गहना औरत कहलाती
तभी वो गृहणी कहि जाती
आदमियों ने भी लालच में उनको
पैसे के जाल में फैंक दिया
बन गयी चक्की पैसे की
बच्चों को अग्नि में सेक दिया
सोचना दोनों पक्षों को गहरायी से
आघात ना लेना मेरी लिखाई से
कहना ये सिर्फ चुनिंदा औरतों के बारे में
खुद में बहन मत ले लेना
हो भूल मेरे शब्दों से अगर
छोटा भाई कहकर माफ़ी दे देना
औरत को करता हूँ सलाम उनको
फर्ज की दिल से कदर है जिनको
नफरत है हर उस मर्द से
जिसके लिए वो दूर होती हैं फर्ज से
आने वाली पीढ़ी को बचाना है
उनको माँ से संस्कार दिलाना है
वो तभी सम्भव हो पायेगा
जब माँ के पास समय आ पायेगा
अभी हूँ लफ्जों का कच्चा खिलाड़ी
खेलनी है रस की लम्बी पारी written -04 /05 /2016
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*वक्त है बेटी सम्भल जा अभी भी */WAQT HAI BETI SAMBHAL JA/BETI BCHAO BETI PADHAO BASED

*वक्त है बेटी सम्भल जा अभी भी */WAQT HAI BETI SAMBHAL JA/BETI BCHAO BETI PADHAO BASED
*वक्त है बेटी सम्भल जा अभी भी *
दिल का महकमा कुछ कह रहा है ।
नहीं पता ये लड़कियां जींस टॉप पर क्यों मरती है ।
पर लगती सूट सलवार में लड़की असल में लड़की,
जिसे मेरी नजरें झुककर सलाम करती हैं।
जीन्स टॉप तो होता है आँखों का घर्षण
सूट सलवार में ही होता , हमारी सभ्यता का दर्शन
गज की गुंधवीं चोटी की रौनक , स्ट्रेट बालों में कहाँ होती है ।
जो करती इस तरह का पहनावा , चर्चा हर अच्छे किस्से में होती है।
आँचल तेरा नहीं बहन , वासना का आधार ।
ढक दुपट्टे से इसे , ले अपना रूप सँवार ।
कुछ पंक्तियों के माध्यम से मैंने , अपने रखें हैं विचार ।
करना बहनों मेरे तर्क पर तुम , दिल से सोच विचार ।
आईने के सामने जाकर , देख तो मेरी पगली बहना ।
फिर लगे पता तुझे , गलत है या सही मेरा कहना ।
अगर आये पसन्द तुझे , ये बताया सोभर रूप
अपना और पहुंचा आगे भी , मेरे इन शब्दों की गूँज
रहने वाले है हरियाणा के , करते सलाम हम पंजाब को भी
यही पहनावा बने पूरे भारत का , यही है मेरे ख्वाब भी
सूट सलवार का जीन्स क्या करे मुकाबला
बेशक आजकल बेटी का इस ओर चल पड़ा काफिला
इस विदेशी नाच में नाच रही बेटी
होता अच्छा अगर संस्कृति न खोती
एक आवाज मेरी माँ को भी है , अपनी बेटियों को समझाएं
खुद भी करे शुरू लेना दुप्पटा , बेटियों को भी आँचल ढकना सिखाएं।
रोब तेरी सुंदरता की रौनक का , सूट सलवार में भी होगा ।
करके देख शुरू ये पहनावा , गलत न बिलकुल ये कहना होगा ।
घूंघट का लेने का नहीं है मेरा कहना ,
पर जो पहचान थी भारत की , मत इसे तुम हर हाल में खोना
अभी भी वक्त है सम्भल जा बेटी , बात देश की आन की
बन जा मूरत सादगी की बहना , दिखा फिर से पहचान हिंदुस्तान की ।
लिखे है काफी कड़वे सच , पर लड़की के बढ़ते कदम पर न दाग बने
करे तरक्की बेटी जी भर के , बड़ा उसका नाम और बड़े उसके भाग बने
उस मजबूर बाप को भी देखा मैंने , जो बेब्स है लड़की को कुछ कहने में
दम घुटता है उस बाप का , ये नंगापन बेटी का सहने में
हो अगर गलत वास्तव में तो , दिल से उतार देना ।
अगर लगे दम इस कड़वे सच में , कुछ बहनों को भी ये विचार देना
मेरी सोच लड़कियों को जीन्स टॉप रोकने की नहीं बल्कि उन्हें सूट सलवार और बालों की गुत बनाकर जो उनमें सभ्य सुंदरता आती है उसके बारे में केवल महसूस कराना है । इसे पढ़ने के बाद भी आप बेशक जीन्स ही पहने । क्योंकि वो ही अपनाएगी जो इस सन्देश को गहरायी से समझ पायेगी।
मेरी पोस्ट का एक एक दर्शक कीमती है । अपनी प्रतिक्रिया कमेंट के रूप में देकर लेखक को प्रोत्साहित करें । जिससे मेरे लेखन में निखार आये।
जागृति के इस आह्वान को अपनी timeline पर भी शेयर कर सहयोग की गति बना सकते हैं । मेरी सभी रचनाओं का आनंद लेने के लिए पेज लाइक कर सकते हैं एवम् मुक्त रूप से सभी अपने विचार रखने के लिए आमन्त्रित हैं ।
© कृष्ण मलिक 21.06.2016 and revised on 25.08.2016

युवा शक्ति/Yuva Shakti

युवा शक्ति/Yuva Shakti
नमस्कार पाठकों !!

इस कविता के माध्यम से युवा पीढ़ी को जागृति का आह्वान किया है | आशा करते हैं  यह आज की पीढ़ी को प्रेरक संदेश  देने का प्रयत्न करेंगी |


उठ जाग अब मेरे देश के नौजवान
तेरे सोने से पूरा जग परेशान
आलस की आंधी में क्यों खो रहा है ।
नशे की नींदों में क्यों इतना सो रहा है ।
तूने ही देश को बुलंदियों पर है लाना
अपनी काबिलियत से है इतिहास रचाना ।
पर तू तो खुद ही हो कमजोर गया ।
न जाने किधर वो तेरा जोर गया ।
लगते थे जोश के जो हर बरस मेले ।
हो गए सब अपने स्वार्थ में अकेले।
नशे की सरिता में क्यों खुद को डुबो रहा है ।
अपनी अमूल्य ताकत को युहीं क्यों खो रहा है ।
अब भी वक़्त है , जाग कर कुछ कर दिखाने का
नाम भारत का आसमान में चमकाने का
देखना नहीं मुड़ कर पीछे , जब तक दिखे ना साहिल
कर जूनून से मेहनत , मिलेगी एक दिन तुझे मंजिल ।
वो कबड्डी की महक और कुश्तियों का कोना ।
क्यों नशे की जिद में तुझे , पड़ा ये सब खोना ।
ताकत और जोश का रच दे फिर से इतिहास ।
न तेरी कमजोरी का उड़ाए , दुनिया उपहास ।
बहन बेटियों की इज्जत का बन तू रखवाला ।
न इनका कर अपमान , बन तू खुद में मतवाला ।
तेरी ताकत के किस्से हो हर ओर, ऐसी ही कर आशा तू
कर कर्म फिर से जिंदादिली के , ऐसी ही कर अभिलाषा तू ।
अब न रह तू अपनी शक्तियों से अनजान
उठा शस्त्र अपने , बन जा महान
उठ जाग मेरे देश के नौजवान
तेरे सोने से पूरा जग परेशान

सिन्दूर की महिमा/SINDOOR KI MAHIMA

सिन्दूर की महिमा/SINDOOR KI MAHIMA
हर शादी शुदा बहन को समर्पित
नारी शक्ति हर पल कर रही
उंचाईयों के एलान
पर इस आधुनिकता की भाग दौड़ में
खो ली खुद की ही पहचान
देखा जग में फैशन का जलवा
तो मलिक ने किया आह्वान
शब्द तरंगों से जगाऊँ बहनों को
लौटा सकूँ उनकी असली पहचान
सिन्दूर की कीमत थी अनमोल कभी
आज रूप पर दाग लगता है
पर सुहागन लगती ही तभी मेरी बहना
जब सिन्दूर मांग में सजता है
फ़ैशन के चक्कर में मेरी बहना
सिन्दूर से हो दूर गयी
कभी कभी मानकर वक्त का कहना
लिपस्टिक मांग में लगाने को क्यों मजबूर हुई
इसकी महिमा का शास्त्र भी करे बखान
क्यों हो गयी बहना तू इससे आजकल अनजान
आज तेरे रूप पर सिन्दूर बन गया दाग कहीं
कभी होता था तेरे पति की दीर्घायु का राज यही
यदि तू देवी है नारी तो ये भी समझ ले
पति को भी मान कम से कम इंसान सही
भक्त ही है बेशक पति तेरा
पर बिना भक्त तो भगवन की भी पहचान नही
अभी भी वक्त है मान ले कहना
बचा ले अपनी मांग का असली गहना
आदमी औरत के वर्षों के भेद मिटाऊं
मलिक की है बस मांग यही
सिन्दूर की महिमा घर घर बतलाऊं
मिल जाये हर औरत को पहचान सही
सिन्दूर की महिमा घर घर बतलाऊं
मिल जाये हर औरत को पहचान सही
Written on 25.08.2016
Copyright to krishan malik ambala

ढूंढ रहा है हर अध्यापक ,अपना वो अस्तित्व आजकल

ढूंढ रहा है हर अध्यापक ,अपना वो अस्तित्व आजकल
अब कहाँ रह गए गुरु जी वाले किस्से
कहाँ रह गयी आदर सम्मान की बातें
गालियां मिलती हर मोड़ पर इन्हें
कहीं मिलती ठोकर , तो कहीं पड़ती लातें
मार्गदर्शन में उसके , चमकते लक्ष्य जिनके
आज वो कहीं खो गए हैं
अध्यापक शब्द का बदला मतलब
छात्र भी आजकल सो गए हैं
अध्यापक का होता था कभी भगवन सा सत्कार
आजकल करते छात्र उनसे , गैरों सा व्यवहार
बन जाओ मंत्री , डॉक्टर और अफसर,
या बन जाओ तहसीलदार
अध्यापक का न भूलो कभी
करना आदर सत्कार
केवल पढ़ाता नहीं है अध्यापक,
जीने की कला सिखाता
लक्ष्य की महिमा बतलाकर
आगे बढ़ने की राह दिखाता
अध्यापक ने ही आपको,
संस्कारिता का पाठ पढ़ाया
बतायी राह पर चलकर
खुद का तूने नाम चमकाया
क्यों खो गयी कदर उसकी
क्यों करता है नादानी
दिल दुखता है उसका भी
देखकर तेरी ये शैतानी
बच्चे हो तुम उसके सब
मात पिता सम व्यवहार करो
अनदेखी क्यों करते हो बातें उसकी
कुछ तो सोच विचार करो
बुरा नहीं है तुम्हारा चाहता वो
बात पते क़ी कहे वो हर पल
ढूंढ रहा है हर अध्यापक
अपना वो अस्तित्व आजकल

ऐसे चमकेगा विश्व में भारत का नाम/How India Will Develop

ऐसे चमकेगा विश्व में भारत का नाम/How India Will Develop


भारत और दूसरे देशों के मित्रों के बीच एक मीटिंग हुई । चर्चा थी देश के बारे , सभी ने अपने अपने देश के बारे तर्क दिए , 
सभी ने कहा भारत के लोगों में तो दम ही नहीं वे पिछड़े है और पिछड़े रहेंगे ।
काफी देर चुप रहने के बाद उस व्यक्ति ने कहा भारत सदियों से सोने की चिड़िया था आज भी है और कल भी रहेगा । विश्व के कई देश व्यापारिक रूप से भारत के लोगों पर निर्भर है । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत में व्यापार के लिए बहुत ही बड़ा मार्किट है । रही बात भारत के पिछड़ेपन की भारत नहीं पिछड़ा बल्कि यहाँ के लोगों की मानसिकता पिछड़ी है ।
 दूसरे देशों के लोग काम को ही जूनून मानते है एवं एन्जॉय करने के लिए उनकी एक दिनचर्या है जिससे उनका जीवन तनावरहित रह पाता है । परन्तु भारत के लोगों के पास ऊर्जा दूसरे देशों के लोगों की 200 प्रतिशत है परन्तु वे अपनी ऊर्जा काम करने में नही बल्कि व्यर्थ की सोच , तनाव एवं निंदा चुगली एवं खुद , खुद के समाज एवं खुद देश के बारे में नकारात्मक बाते करने में गुजार देते हैं । इतना सब कुछ करने के बाद उनके पास ऊर्जा ही नहीं रहती तो वे नया रचनात्मक कैसे करेंगे , वे पुराने को ही क्रियात्मक ढंग से नहीं कर पाते । रही बात फैशन की तो विदेशों में तो चलता है शोंक और भारत में चलता है साँसों की जरूरत जिस कारण से प्रत्येक मध्यम वर्गीय इंसान महंगे मोबाइल , महँगे कपड़े , महंगे घर के अन्य फ़िज़ूल शोंक में खुद की ऊर्जा , धन एवं समय व्यर्थ कर खुद को तनाव के घेरे में ले लेता है फिर उसे बिमारियों का बुलावा आ जाता है ।
 आजकल एक नई बीमारी मोबाइल और उस पर इंटरनेट की चल गई है दूसरे देश के लोग काम के वक़्त काम और मस्ती के वक़्त मस्ती करेंगे परन्तु हमारे भारत में काम के वक़्त इन्टरनेट चैट वगैरा में मशगूल बाकि वक्त में एन्जॉय या आराम ।तो रचनात्मक के लिए न बचा समय और ऊर्जा ।
उस व्यक्ति में करारे जवाब में कहा आज बेशक इन्टरनेट चैटिंग , फेसबुक , व्हाट्स एप्प या अन्य फैशन के हथियारों की गलत फहमी के सुकून में लोग उलझे हैं लेकिन जिस दिन मेरे भारत के लोग फैशन , चैटिंग एवं निंदा चुगली आदि नकारात्मक बीमारियों से निकलकर अपनी पूरी ऊर्जा जो कि दूसरे देशों के लोगों के 200 प्रतिशत के बराबर है लगाने लग गये । उस दिन कोई भी देश भारत के आस पास भी नहीं भटकेगा ये मेरा वादा है । देखो वो आदमी भारत आ कर कब लोगों को समझाता है और कम मेरा भारत बदलने लगता है ।

Monday, 23 March 2020

नारी शक्ति/WOMEN EMPOWERMENT ARTICLE/Women Empowerment Poetry/

जैसा कि आप सब जानते हैं हम पिछले काफी वर्षों से प्रधानमन्त्री मोदी जी के आह्वान पर कंधे से कंधा मिलाकर बेटी बचाव और बेटी पढ़ाओ के नारे पर जागरूकता में निकल पढ़े हैं और इससे काफी स्तर पर विकास की आंधी आई है | इसके सकारात्मक परिणाम भी निकल कर आये हैं और बेटियाँ अब घर से निकल कर पढ़ लिख कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, अब वह अंगूठा छाप औरत नहीं बल्कि एक जोशीली पढ़ी लिखी नारी बन कर उभरी हैं, लेकिन कहते हैं न अच्छाई और बुराई साथ साथ सामान्तर चलते हैं उसी हिसाब से इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक परिणाम भी निकल कर आये हैं, उससे पहले मै ये पुरुषों को जागरूक करना चाहूँगा क़ी यदि आपके घर की स्त्रियाँ कहीं न कहीं कारोबार या नौकरी पेशे में हैं तो घर के कार्यों में उसका हाथ बटाने में संकोच न करें | आपके घर की सशक्त नारी को आपकी और से मानसिक बल की भी जरूरत रहती है और अगर ये उसे समय समय पर मिलता रहे तो आपके परिवार की सुख समृद्धि में चार चांद लग जाते हैं |

इसी विषय पर के जागरूकता कविता आपके सामने रखी जा रही है |



लड़ो अनपढ़ता से,
पढ़ो आगे बढ़ो प्रगति पथ पर,
मर्यादा का तुम ध्यान रखना ।

ओ मेरे देश की नारी,

कर ले अब तू अब तैयारी,
हर हाल में भारत का मान रखना ।




न डरना पाबंदियों से,


रखकर सभी को अपने साथ,
अब शक्ति के रूप में है दिखना ।



सशक्त हो आगे आकर,

निर्णय लेने की ताकत पा कर,
नया इतिहास है अब तूने रचना ।

Wednesday, 4 March 2020

धर्म के रखवालों से/DHARAM KE RAKHWALON SE

क्रिसमस के मौके पर एवम तुलसी पूजन के अवसर पर आपका ये हिन्दू भाई सर्व धर्म एकता का संदेश देते हुए ।
               


धर्म के रखवालों से करनी एक गुजारिश है ।
सभी धर्मों का करें वो आदर , करनी यही सिफारिश है ।

भगवन होते हैं एक , रूप हैं चाहे अनेक ।
क्यों कहते ये तेरा मेरा , क्यों करते तू अपने वाला देख ।

हिन्दू को मुस्लिम से , मुस्लिम को हिन्दू से
सिख को ईसाई से , ईसाई को सिख से
हिन्दू को ईसाई से , ईसाई को हिन्दू से
मुस्लिम को ईसाई से , ईसाई को मुस्लिम से
क्यों प्रेम नहीं त्योहारों पर ।
चल पड़े अपनी अपनी धुन में सभी ,
अपने धर्म के बाजारों पर ।

सभी धर्म हैं एक समान , सभी का सम्मान करो ।
सभी त्योहारों को मिल कर मनाओ , सभी से खुशियोंं को साँझा करो ।

हिन्दू कहे मुझे ईद से क्या , मुस्लिम कहे मेरी कौन सी दीवाली ।
सिख कहे मेरा कौन सा क्रिसमस , ईसाई कहे मेरी कैसी होली ।

एक दूसरे के त्योहारों में होना शरीक हंस कर
यही तो पहचान मेरे हिंदुस्तान की
जान लो बस तुम ये सब
ये है बात भारत की शान की

सभी तक यही है सन्देश पहुँचाना
सभी धर्मों का करना सम्मान सिखाना
मिलकर मनाओ क्रिसमस भी तुम
तुलसी पूजन का भी इतिहास बताना
गुरुपर्व भी अगले दिन है आता
शहीदों को है याद करवाना
पढ़कर ये सब प्यार की बातें
चिल्लाहट मूर्खता की वाजिब है ।
फिर भी एक बार तो मैंने करनी यही गुजारिश है ।
सर्व धर्म एकता के सन्देश की , हर कोने में करनी सिफारिश है ।
धर्मों के रखवालों से करनी एक गुजारिश है ।
सभी धर्मों का करें वो आदर , करनी यही सिफारिश है। 

©® कृष्ण मलिक अम्बाला

तलाक पर जागृति कविता/DIVORCE AWARENESS POETRY

तलाक पर जागृति कविता/DIVORCE AWARENESS POETRY
तलाक लफ्ज ही है दर्दनाक
बस इतना जान लीजिए
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक की नौबत न आने दीजिये ।
ढाई दिन की है जिंदगी
एक दूसरे पर वार दीजिये
आएं भूचाल जो जिंदगी में
हंस खेल के गुजार दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,
केवल सुख ही सुख हो हर पल
ऐसा कभी होता ही नहीं
ऐसा चाहते अगर माँ बाप तुम्हारे भी
तो तुम्हारा भी जन्म होता नहीं
लड़ना झगड़ना तो है बेहतरीन पल जिंदगी के
बस इतना ही विचार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,
मन में हो शक का भार अगर
जल्दी से साथी से हल्का कर लीजिए
मन ही मन पानी देकर इसे
और न कड़वा ये विष कीजिये
होता है अक्सर शक से विनाश देखा मैंने
इसे दूर कर जिंदगी सँवार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे ,,,,,,,,
मित्र होते है करीबी , जीवन साथी तुम्हारे
चाहे नजरें पूरा संसार घुमा लीजिये
पग पग साथ की पड़ती है जरूरत उनकी
इतना जरूर समझ लीजिए
टूट जाते हैं मोती दिल की माला के बिछुड़कर
साथ यूँ न आसानी से छूटने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,,,
बच्चों के मात पिता जब बिछड़ने की सोचना
उनका क्या होगा भविष्य , ये भी तो देखना
माँ बाप की कमी को उम्र भर तरसते वो
कौन सुनेगा तुम्हारे बाद ,उनके तन्हा दर्द की वेदना
बिन माँ बाप खाते हैं ठोकरे बच्चे उम्र भर
ये तस्वीर मन में खींच लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,,,,
सास को माँ और माँ को सास
जो समझे शादी के बाद
समझना उसकी जिंदगी में आनंद ही आनंद
मिलता रहेगा परमपिता का आशीर्वाद
पत्नी को समझे जो लक्ष्मी अपने घर की
शक का करता रहे हर पल विनाश
उसकी संवर गयी रे जिंदगी
हुआ उस घर में जो राम राज
बन्द कमरे की गलतफहमियां
कमरे में ही सुलझा लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,,,,
रिश्ता जोड़ने से पहले एक सावधानी
बड़े बुजुर्ग आज के समय में जान लीजिए
जानें एक दूसरे को वो पहले
2 से 3 बार उन्हें बेशक मिलने दीजिये
विचारों के तालमेल है जरूरत आज की
यही न मिलना है दीवार आज की
इस दीवार को न शुरू से ही पनपने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,
लड़की के परिजन आज के समझे अगर इस बात को
न झांकिए शादी के बात बिलकुल भी , बेटी के परिवार को
न उजड़ेगी बेटी की जिंदगी कभी
बेशक हजार बार आजमा लीजिये
कभी भी गलती से बेटी को ,
ससुराल के मामले में
बेवजह न अपनी राय दीजिये
हो सके तो जितना भी अगर तुमसे
बेटी से दुश्मनी कर लीजिए
सीख जायेगी खुद बेखुद लड़खड़ाकर
वो जीना आख़िरकार
उसे अपने दम पर जीने का
मौका तो दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे,,,
एक का कहना , दूसरे ने सहना
ससुराल का रहना , मायके न कहना
ये दोहा जिंदगी में उतार लीजिये
हसीन होगी जिंदगी तुम्हारी
जो इन बातों को विचार लीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे ,,,,
पवित्र रिश्ता निभाओ अपनी सूझबूझ से हरदम
जीवन साथी तुम , दिया और बाती तुम
मांग चमकाकर सजना की हर पल बहना
कभी न ये सूरज ढलने दीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक लफ्ज को खुद से कोसों दूर कीजिये
विनती है दुनिया वालों तुमसे
तलाक की नौबत न आने दीजिये,,,,,,,,,
आज की हर युवा पीढ़ी को समर्पित,,,,,,,,,,,